जय जिनेन्द्र | अहिंसा परमो धर्मः
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प्रासुक नीर: जीव दया, अहिंसा एवं आत्म-शुद्धि का पावन विधान

नीर छान कर क्यों पिया जाता है ?

एक बूंद अनछने नीर में असंख्य जीव होते हैं। जैनाचार्यों और आधुनिक विज्ञान दोनों ने इस परम सत्य की पुष्टि की है। शुद्ध सफेद दोहरे छन्ने से छनाई, प्रामाणिक जीवनी एवं काल मर्यादा का पालन कर जीव हिंसा के प्रथम पाप से बचें।

36,450+ जीव
एक बूंद अनछने जल में वैज्ञानिक पुष्टि
दोहरा सूती छन्ना
सूर्य किरण अप्रवेशी मोटा वस्त्र
प्रामाणिक जीवनी
बहते नीर में सूक्ष्म जीवों की रक्षा
त्रिविध मर्यादा
48 मिनट • 6 घंटे • 24 घंटे

नीर छान कर क्यों पिया जाता है ?

"अहिंसा परमो धर्मः" — जैन धर्म में जीव दया की शुरुआत हमारे खान-पान और जल के विवेक से होती है। अनछने पानी के उपभोग को सूक्ष्म जीवों की हिंसा मानकर सर्वथा त्याज्य बताया गया है।

पूज्य जैनाचार्यों का आगम वचन
"एक बूंद अनछने नीर में इतने जीव होते हैं अगर उन्हें कबूतर के बराबर बड़ा किया जाए तो पूरा एक लाख योजन प्रमाण पूरा जम्बूद्वीप भर जाए।"

"In a single drop of unfiltered water, there are so many living beings that if they were enlarged to the size of a pigeon, the entire Jambudvipa measuring one lakh yojanas would be completely filled."

आगम सम्मत प्रामाणिकता (Jain Agamas)

जैनाचार्यों का दिव्य ज्ञान

असंख्य जीव

सर्वज्ञ तीर्थंकरों एवं जैनाचार्यों ने सदियों पूर्व बिना किसी भौतिक यंत्र के अपने अतीन्द्रिय केवलज्ञान द्वारा प्रमाणित किया कि जल की एक अकेली बूंद में असंख्य जलकायिक जीव (जलकायी सूक्ष्म जीव) विद्यमान होते हैं।

प्रथम महापाप: अनछने नीर के उपयोग में हिंसा नामक प्रथम पाप माना जाता है।
आधुनिक विज्ञान की पुष्टि (Modern Science)

वैज्ञानिक शोध एवं सूक्ष्मदर्शी

36,450 सूक्ष्म जीव

आधुनिक वैज्ञानिकों ने शक्तिशाली सूक्ष्मदर्शी (Microscopes) से कच्चे अनछने जल का परीक्षण कर पुष्टि की है कि एक बूंद कच्चे पानी में औसतन 36,450 सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, माइक्रो-ऑर्गेनिज्म) गतिमान होते हैं।

वैज्ञानिक समन्वय एवं लैब परीक्षण: दोहरे सूती छन्ने की क्षमता को BIS प्रमाणित प्रयोगशालाओं (BIS Certified Labs) द्वारा तथा कंगन वॉटर (Kangen Water) के साथ तुलनात्मक परीक्षण द्वारा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कराया गया है।
अनछने नीर का त्याग क्यों आवश्यक है?

जब हम बिना छाने पानी पीते हैं या उसका उपयोग करते हैं, तो करोड़ों सूक्ष्म जीवों की अकाल मृत्यु हो जाती है। यह जीव हिंसा का प्रथम और घोर पाप है। इसलिए जैन संस्कृति में प्रत्येक श्रावक-श्राविका के लिए प्रासुक नीर का पान अनिवार्य कर्तव्य है।

प्रत्यक्ष लैब परीक्षण एवं वैज्ञानिक प्रामाणिकता

शासकीय मान्यता प्राप्त लैब रिपोर्ट एवं कंगन वॉटर तुलनात्मक परीक्षण

प्रासुक नीर अणुव्रत समिति द्वारा सूती दोहरे छन्ने की शुद्धिकरण क्षमता को मानक प्रयोगशालाओं (BIS Certified Labs) तथा आधुनिक उन्नत तकनीकों के समानांतर प्रामाणिक सिद्ध किया गया है।

BIS प्रमाणित लैब द्वारा माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट

पारंपरिक दोहरे छन्ने की शुद्धिकरण क्षमता को मानक BIS प्रमाणित प्रयोगशालाओं (ETS-LAB) द्वारा वैज्ञानिक रूप से परीक्षण कराकर प्रमाणित कराया गया है। रिपोर्ट में सूक्ष्म जीवों के पूर्ण निष्कासन व जल की सुरक्षा की पुष्टि हुई है।

Report No: ETS/1072/07/2025

कंगन वॉटर (Kangen Water) तुलनात्मक परीक्षण

उन्नत जल शोधन तकनीकों जैसे कंगन वॉटर (Kangen Water), आर.ओ. एवं बोतलबंद पानी के समानांतर छने हुए प्रासुक जल का pH स्तर, प्राकृतिक खनिज संतुलन और प्रभावशीलता का प्रत्यक्ष परीक्षण संपन्न किया गया।

Acidic & Alkaline Comparison

नीर छानने व जीवनी करने की सम्पूर्ण विधि

इस पावन वीडियो में हमारे ट्रस्ट के उद्देश्य एवं नीर को प्रासुक करने की संपूर्ण व्यावहारिक प्रक्रिया को प्रत्यक्ष दिखाया गया है — ताकि आप अपने घर में सही विधि से नीर छानकर जीव रक्षा का पुण्य लाभ अर्जित कर सकें।

वीडियो मुख्य बिंदु (Key Highlights)

वीडियो में बताई गई चार प्रमुख बातें:

  • १
    शुद्ध सूती दोहरा छन्ना
    छन्ना इतना मोटा और दोहरा होना चाहिए कि उसके आर-पार सूर्य की किरणें भी प्रवेश न कर सकें।
  • २
    नीर छानने की सावधानी
    पात्र को हिलाए बिना नीर को धीरे-धीरे छानना ताकि जलकायी जीवों को आघात न पहुंचे।
  • ३
    प्रामाणिक जीवनी विधान
    छने हुए नीर से छन्ने को अंदर-बाहर चारों ओर धोकर उस जल को बहते नीर या प्राकृतिक स्रोत में विसर्जित करना।
  • ४
    काल मर्यादा का कठोर पालन
    सादा छना जल 48 मिनट, गर्म/मसाला नीर 6 घंटे, और उबला जल 24 घंटे की मर्यादा में ही पीने योग्य रहता है।

नीर को प्रासुक करने की चार पावन अवस्थाएँ

जैन शास्त्रों में नीर को प्रासुक (जीव-रहित एवं अहिंसक) करने की वैज्ञानिक और विधि-सम्मत प्रक्रिया बताई गई है।

प्रामाणिक विधि एवं सामग्री दर्शन

सूती सफेद दोहरा छन्ना ही क्यों अनिवार्य है?

चित्र में स्पष्ट देखा जा सकता है कि 'प्रासुक मर्यादित नीर' का मूल सघन दोहरा सूती वस्त्र किस प्रकार पात्र के मुख पर बांधा जाता है। यह छन्ना इतना सघन होता है कि सूर्य की किरणें भी पार नहीं हो सकतीं, जिससे सूक्ष्म जलकायी जीवों की पूर्ण रक्षा होती है।

जीवनी का पावन रहस्य: नीर छानने के पश्चात छन्ने पर एकत्र सूक्ष्म जीवों को मरने नहीं दिया जाता, बल्कि छने हुए जल से छन्ने को धोकर उस जल को बहते हुए प्राकृतिक नीर में बहा दिया जाता है। इसे ही जैन संस्कृति में 'जीवनी' कहते हैं।
प्रथम चरण

सूती सफेद दोहरा छन्ना

जैन धर्म में सूती सफेद मोटे दोहरे छन्ने से जिसमें सूर्य की किरण प्रवेश को प्राप्त न हो, ऐसे छानकर नीर को प्रासुक किया जाता है। पतला या सिंथेटिक कपड़ा छनाई के योग्य नहीं माना जाता।

द्वितीय चरण

यत्नाचार पूर्वक छनाई

छन्ना स्वच्छ पात्र पर अच्छी तरह बांधकर स्थिर किया जाता है। नीर को शांत भाव से एकधार डालते हैं। छनने के उपरांत छना हुआ जल पूर्णतः शुद्ध और ग्राह्य होता है।

तृतीय चरण (जीवनी)

जीवनी विधान (जीव रक्षा)

छने हुए नीर के द्वारा छन्ने को चारों तरफ अंदर बाहर नीर डालना और उस पानी को बहते हुए नीर में बहा देना 'जीवनी' कहलाती है, जिससे जीवों की रक्षा होती है और वे अपने मूल जल में सुरक्षित पहुंच जाते हैं।

चतुर्थ चरण

काल मर्यादा का पालन

नीर छानने से उसकी मर्यादा 48 मिनट हो जाती है। स्वाद/रंग बदलकर गर्म करने पर 6 घंटे और पूर्ण उबालने पर 24 घंटे हो जाती है। मर्यादा बीतने पर नीर पुनः अप्रासुक हो जाता है।

प्रासुक नीर की त्रि-स्तरीय काल मर्यादा

जैन आगमों के अनुसार जिस प्रकार औषधियों की एक्सपायरी डेट होती है, उसी प्रकार प्रासुक नीर की भी निश्चित काल मर्यादा होती है।

४८ मिनट्स

साधारण छना जल (१ अंतर्मुहूर्त)

दोहरा सूती छन्ना लगाकर जल छानने पर उसकी मर्यादा 48 मिनट (1 अंतर्मुहूर्त) रहती है। 48 मिनट के भीतर ही इसका उपभोग कर लेना चाहिए।

शास्त्रसम्मत नियम: 48 मिनट बीत जाने पर इसमें पुनः सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति होने लगती है, अतः इसे 48 मिनट के भीतर आगे की मर्यादा हेतु प्रासुक करना आवश्यक है।
६ घंटे

स्वाद/रंग परिवर्तन व गुनगुना नीर

जल में लौंग, सौंफ, मिश्री आदि डालकर स्वाद या रंग बदलने पर, अथवा जल को हल्का गुनगुना (प्रासुक) करने पर मर्यादा 6 घंटे हो जाती है।

नियम: 48 मिनट के भीतर ही प्राकृतिक द्रव्यों का सम्मिश्रण या गुनगुना करने से 6 घंटे तक जीवोत्पत्ति रुकी रहती है।
२४ घंटे

पूर्णतः उबला (खौलता हुआ) नीर

छने हुए जल को अग्नि पर पूर्णतः अच्छी तरह उबालने (खौलने) पर उसकी मर्यादा 24 घंटे (एक अहोरात्र) हो जाती है।

नियम: 24 घंटे बीतने के उपरांत उबला हुआ जल भी मर्यादा-रहित (अप्रासुक) हो जाता है। अगले दिन प्रातः नवीन प्रासुक जल तैयार करना चाहिए।
जल शुद्धि एवं जीवदया अभियान

हमारी उपलब्धियाँ (Our Sacred Milestones)

अहिंसा एवं जीव रक्षा के पावन संकल्प के साथ PRASUK NEER ANUVRAT TRUST द्वारा संचालित जल शुद्धि अभियान की सेवा यात्रा।

15,000+

शुद्ध जल-छन्ने वितरित

जैन एवं जैनेतर समाज के 15,000+ परिवारों तक शुद्ध जल-छन्ने वितरित किए गए हैं ताकि प्रत्येक घर में शास्त्रसम्मत छना हुआ जल ही प्रयोग में आए।

15 लाख+ लीटर

छना हुआ मर्यादित जल सेवित

विभिन्न पंचकल्याणक महोत्सवों एवं आध्यात्मिक शिविरों में 15 लाख लीटर से अधिक छना हुआ मर्यादित प्रासुक जल श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराया गया।

विज़न (दूरदृष्टि)

प्रत्येक जैन श्रावक के मूल आचरण का पालन:

नित्य देव दर्शन
रात्रि भोजन त्याग
छने शुद्ध जल का प्रयोग
(जीवदया पालन)
सेवा विस्तार

प्रमुख आयोजन स्थल (Major Event Locations)

ट्रस्ट द्वारा आयोजित एवं प्रासुक नीर सेवा प्रदान किए गए प्रमुख धार्मिक आयोजन स्थल:

शिवाजी पार्क

Shivaji Park

हस्तिनापुर

Hastinapur Teerth

जबलपुर

Jabalpur

बोह गाँव

Boh Gaon

वर्धमान ज्ञानतीर्थ , नोएडा

Vardhman Gyan Teerth, Noida

राम गली, विश्वास नगर

Ram Gali, Vishwas Nagar

ग्वालियर शिविर

Gwalior Shibir

दिल्ली शिविर

Delhi Shibir

प्रासुक नीर अणुव्रत ट्रस्ट के चार पावन स्तम्भ

हमारा ट्रस्ट समाज में अहिंसा, शुद्धि, नैतिक संयम और निस्वार्थ सेवा के संवर्धन हेतु कटिबद्ध है।

प्रासुक नीर एवं जीव दया

शुद्ध दोहरे छन्ने, जीवनी विधान और काल मर्यादा का प्रचार-प्रसार कर घर-घर में सूक्ष्म जलकायी जीवों की रक्षा की प्रेरणा देना।

अणुव्रत नैतिक आचार

अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पावन अणुव्रतों को दैनिक जीवन में अपनाकर समाज में सद्भाव स्थापित करना।

स्वाध्याय एवं साधना

आध्यात्मिक शिविर, जैन दर्शन स्वाध्याय, ध्यान एवं सत्संग के माध्यम से आत्म-कल्याण और मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त करना।

निस्वार्थ मानव सेवा

साधर्मिक बंधुओं की सहायता, तीर्थ यात्रियों के लिए शुद्ध प्रासुक जल की व्यवस्था, स्वास्थ्य सहायता एवं पर्यावरण संरक्षण सेवा।

सहभागिता शुल्क: ₹8,500 प्रति व्यक्ति

Auspicious Spiritual & Anuvrat Sammelan 2026

प्रासुक नीर, अणुव्रत नैतिक आचार, एवं जैन साधना पर आधारित ४-दिवसीय पावन सम्मेलन। विद्वानों के प्रवचन, सात्विक चौविहार आहार, प्रासुक जल व्यवस्था, एवं ध्यान साधना में सपरिवार भाग लें।

15 Nov 2026 – 18 Nov 2026
साहिबाबाद, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)
सीमित स्थान उपलब्ध

सीधी सहभागिता

व्यक्तिगत एवं पारिवारिक पंजीकरण तुरंत पूर्ण करें।

पंजीकरण फॉर्म भरें
साधर्मी सेवा में सदैव तत्पर

प्रासुक नीर एवं ट्रस्ट संबंधी किसी भी जिज्ञासा के लिए संपर्क करें

शुद्ध सूती छन्ने, जीवनी प्रक्रिया, या आगामी धार्मिक शिविरों में सहभागिता हेतु हमारे ट्रस्ट कार्यालय अथवा हेल्पलाइन पर निःसंकोच संपर्क करें।

WhatsApp Helpline Call: 9812435652
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