एक बूंद अनछने नीर में असंख्य जीव होते हैं। जैनाचार्यों और आधुनिक विज्ञान दोनों ने इस परम सत्य की पुष्टि की है। शुद्ध सफेद दोहरे छन्ने से छनाई, प्रामाणिक जीवनी एवं काल मर्यादा का पालन कर जीव हिंसा के प्रथम पाप से बचें।
"अहिंसा परमो धर्मः" — जैन धर्म में जीव दया की शुरुआत हमारे खान-पान और जल के विवेक से होती है। अनछने पानी के उपभोग को सूक्ष्म जीवों की हिंसा मानकर सर्वथा त्याज्य बताया गया है।
सर्वज्ञ तीर्थंकरों एवं जैनाचार्यों ने सदियों पूर्व बिना किसी भौतिक यंत्र के अपने अतीन्द्रिय केवलज्ञान द्वारा प्रमाणित किया कि जल की एक अकेली बूंद में असंख्य जलकायिक जीव (जलकायी सूक्ष्म जीव) विद्यमान होते हैं।
आधुनिक वैज्ञानिकों ने शक्तिशाली सूक्ष्मदर्शी (Microscopes) से कच्चे अनछने जल का परीक्षण कर पुष्टि की है कि एक बूंद कच्चे पानी में औसतन 36,450 सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, माइक्रो-ऑर्गेनिज्म) गतिमान होते हैं।
जब हम बिना छाने पानी पीते हैं या उसका उपयोग करते हैं, तो करोड़ों सूक्ष्म जीवों की अकाल मृत्यु हो जाती है। यह जीव हिंसा का प्रथम और घोर पाप है। इसलिए जैन संस्कृति में प्रत्येक श्रावक-श्राविका के लिए प्रासुक नीर का पान अनिवार्य कर्तव्य है।
प्रासुक नीर अणुव्रत समिति द्वारा सूती दोहरे छन्ने की शुद्धिकरण क्षमता को मानक प्रयोगशालाओं (BIS Certified Labs) तथा आधुनिक उन्नत तकनीकों के समानांतर प्रामाणिक सिद्ध किया गया है।
पारंपरिक दोहरे छन्ने की शुद्धिकरण क्षमता को मानक BIS प्रमाणित प्रयोगशालाओं (ETS-LAB) द्वारा वैज्ञानिक रूप से परीक्षण कराकर प्रमाणित कराया गया है। रिपोर्ट में सूक्ष्म जीवों के पूर्ण निष्कासन व जल की सुरक्षा की पुष्टि हुई है।
उन्नत जल शोधन तकनीकों जैसे कंगन वॉटर (Kangen Water), आर.ओ. एवं बोतलबंद पानी के समानांतर छने हुए प्रासुक जल का pH स्तर, प्राकृतिक खनिज संतुलन और प्रभावशीलता का प्रत्यक्ष परीक्षण संपन्न किया गया।
इस पावन वीडियो में हमारे ट्रस्ट के उद्देश्य एवं नीर को प्रासुक करने की संपूर्ण व्यावहारिक प्रक्रिया को प्रत्यक्ष दिखाया गया है — ताकि आप अपने घर में सही विधि से नीर छानकर जीव रक्षा का पुण्य लाभ अर्जित कर सकें।
जैन शास्त्रों में नीर को प्रासुक (जीव-रहित एवं अहिंसक) करने की वैज्ञानिक और विधि-सम्मत प्रक्रिया बताई गई है।
चित्र में स्पष्ट देखा जा सकता है कि 'प्रासुक मर्यादित नीर' का मूल सघन दोहरा सूती वस्त्र किस प्रकार पात्र के मुख पर बांधा जाता है। यह छन्ना इतना सघन होता है कि सूर्य की किरणें भी पार नहीं हो सकतीं, जिससे सूक्ष्म जलकायी जीवों की पूर्ण रक्षा होती है।
जैन धर्म में सूती सफेद मोटे दोहरे छन्ने से जिसमें सूर्य की किरण प्रवेश को प्राप्त न हो, ऐसे छानकर नीर को प्रासुक किया जाता है। पतला या सिंथेटिक कपड़ा छनाई के योग्य नहीं माना जाता।
छन्ना स्वच्छ पात्र पर अच्छी तरह बांधकर स्थिर किया जाता है। नीर को शांत भाव से एकधार डालते हैं। छनने के उपरांत छना हुआ जल पूर्णतः शुद्ध और ग्राह्य होता है।
छने हुए नीर के द्वारा छन्ने को चारों तरफ अंदर बाहर नीर डालना और उस पानी को बहते हुए नीर में बहा देना 'जीवनी' कहलाती है, जिससे जीवों की रक्षा होती है और वे अपने मूल जल में सुरक्षित पहुंच जाते हैं।
नीर छानने से उसकी मर्यादा 48 मिनट हो जाती है। स्वाद/रंग बदलकर गर्म करने पर 6 घंटे और पूर्ण उबालने पर 24 घंटे हो जाती है। मर्यादा बीतने पर नीर पुनः अप्रासुक हो जाता है।
जैन आगमों के अनुसार जिस प्रकार औषधियों की एक्सपायरी डेट होती है, उसी प्रकार प्रासुक नीर की भी निश्चित काल मर्यादा होती है।
दोहरा सूती छन्ना लगाकर जल छानने पर उसकी मर्यादा 48 मिनट (1 अंतर्मुहूर्त) रहती है। 48 मिनट के भीतर ही इसका उपभोग कर लेना चाहिए।
जल में लौंग, सौंफ, मिश्री आदि डालकर स्वाद या रंग बदलने पर, अथवा जल को हल्का गुनगुना (प्रासुक) करने पर मर्यादा 6 घंटे हो जाती है।
छने हुए जल को अग्नि पर पूर्णतः अच्छी तरह उबालने (खौलने) पर उसकी मर्यादा 24 घंटे (एक अहोरात्र) हो जाती है।
हमारा ट्रस्ट समाज में अहिंसा, शुद्धि, नैतिक संयम और निस्वार्थ सेवा के संवर्धन हेतु कटिबद्ध है।
शुद्ध दोहरे छन्ने, जीवनी विधान और काल मर्यादा का प्रचार-प्रसार कर घर-घर में सूक्ष्म जलकायी जीवों की रक्षा की प्रेरणा देना।
अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पावन अणुव्रतों को दैनिक जीवन में अपनाकर समाज में सद्भाव स्थापित करना।
आध्यात्मिक शिविर, जैन दर्शन स्वाध्याय, ध्यान एवं सत्संग के माध्यम से आत्म-कल्याण और मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त करना।
साधर्मिक बंधुओं की सहायता, तीर्थ यात्रियों के लिए शुद्ध प्रासुक जल की व्यवस्था, स्वास्थ्य सहायता एवं पर्यावरण संरक्षण सेवा।
प्रासुक नीर, अणुव्रत नैतिक आचार, एवं जैन साधना पर आधारित ४-दिवसीय पावन सम्मेलन। विद्वानों के प्रवचन, सात्विक चौविहार आहार, प्रासुक जल व्यवस्था, एवं ध्यान साधना में सपरिवार भाग लें।
शुद्ध सूती छन्ने, जीवनी प्रक्रिया, या आगामी धार्मिक शिविरों में सहभागिता हेतु हमारे ट्रस्ट कार्यालय अथवा हेल्पलाइन पर निःसंकोच संपर्क करें।